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छप के बिकते थे जो…̲

छप के बिकते थे जो अख़बार..,

सुना है इन दिनों वो बिक के छपा करते हैं…!

!!̲

हम कर्मचारी देश पर बोझ हैं, तो फिर ये नेता क्या हैं

पेपर में खबर आई है कि महंगाई भत्ता में 2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है। सुनकर खुशी हुई। पर साथ में यह भी खबर थी कि इस फैसले से देश पर प्रतिवर्ष 6077 करोड़ का बोझ पड़ेगा।

बहुत दुख हुआ यह जानकर की कर्मचारी देश पर बोझ हैं।

कुछ दिन पहले ही सांसदों के भत्तों में लगभग 50-60 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी पर कहीं भी यह खबर नही आई कि इस फैसले से देश पर कितना बोझ पड़ा।

काफी खोजबीन करने पर यह पता चला कि प्रति सांसद लगभग 6 लाख रुपये बढ़ाये गए और आज प्रति कर्मचारी केवल 2 से 5 हजार वार्षिक वृद्धि हुई है। माफ करिये बोझ बढ़ा है।

मेरे देश की मिडिया और सरकार को मेरा कोटी कोटी नमन …..

वंदना

शुक्लवर्ण वाली,संपूर्ण चराचर जगत्‌ में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान केअंधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान्‌ बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा की मैं वंदना करता हूँ।